सदाबहार (vinca rosea)

सदाबहार (vinca rosea ) - Blooming in India


Catharanthus roseus, commonly known as the Madagascar periwinkle, rose periwinkle, or rosy periwinkle, is a species of flowering plantin the dogbane family Apocynaceae. It is native and endemic to Madagascar, but grown elsewhere as an ornamental and medicinal plant, a source of the drugs vincristine and vinblastine, used to treat cancer. Other English names include '“Cape periwinkle” and "old-maid". I was formerly included in the genus Vinca as Vinca rosea.



















सदाफूली या सदाबहार या सदा सुहागन बारहों महीने खिलने वाले फूलों का एक पौधा है। इसकी आठ जातियां हैं। इनमें से सात मेडागास्कर में तथा आठवीं भारतीय उपमहाद्वीप में पायी जाती है। इसका वैज्ञानिक नाम केथारेन्थस है। भारत में पायी जाने वाली प्रजाति का वैज्ञानिक नाम केथारेन्थस रोजस है। इसे पश्चिमी भारत के लोग सदाफूली के नाम से बुलाते है।
*सदाबहार नाम के अनुसार ही सदाबहार (evergreen) पौधा है जिसको उगाने से आस-पास में सदैव हरियाली बनी रहती है। कसैले स्वाद के कारण तृष्णभोजी जानवर (herbivores) इस पौधे का तिरस्कार करते हैं। सदाबहार पौधों के आस-पास कीट, फतिगें, बिच्छू तथा सर्प आदि नहीं फटकते (शायद सर्पगंधा समूह के क्षारों की उपस्थिति के कारण) जिससे पास-पड़ोस में सफाई बनी रहती है। सदाबहार की पत्तियाँ विघटन के दौरान मृदा में उपस्थित हानिकारक रोगाणुओं को नष्ट कर देती हैं।बवासीर होने की स्थिति में इसके पत्तियों और फूलों को कुचलकर लगाने से बेहद फायदा मिलता है, ऐसा रोज़ाना करें।
*सदाबहार की जड़ों में रक्त शर्करा को कम करने की विशेषता होती है। अतः पौधे का उपयोग मधुमेह के उपचार में किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका में पौधे का उपयोग घरेलू नुस्खा (folk remedy) के रूप में मधुमेह के उपचार में होता रहा है। पत्तियों के रस का उपयोग हड्डा डंक (wasp sting) के उपचार में होता है। जड़ का उपयोग उदर टानिक के रूप में भी होता है। पत्तियों का सत्व मेनोरेजिया (Menorrhagia) नामक बिमारी के उपचार में दिया जाता है। इस बिमारी में असाधारण रूप से अधिक मासिक धर्म होता है।

*त्वचा पर खुजली, लाल निशान, रशेस या किसी तरह की एलर्जी होने पर सदाबहार (vinca rosea) की पत्तियों के रस को लगाने पर आराम मिलता है।
* त्वचा पर घाव या फोड़े-फुंसी हो जाने पर इसकी पत्तियों का रस दूध में मिला कर लगाते हैं।
*. दो फूल को एक कप उबले पानी या बिना शक्कर की उबली चाय में पीने से मधुमेह में फायदा पहुंचाता है।
*कैंसर ऐसी बीमारी है जिसका पता सामान्यत: रोग बढऩे के बाद ही चल पाता है। इस स्थिति में सर्जरी ही बीमारी के विकल्प के रूप में सामने आती है। आयुर्वेद शोधकर्ताओं ने सफेद फूल वाले सदाबहार पौधे को इस बीमारी में प्रभावी माना है।
इस तरह हैं कैंसर में लाभकारी:
ये पत्तियां कैंसररोधी हैं। ये रोग बढ़ाने वाली कोशिकाओं के विकास को रोकती हैं साथ ही इस दौरान क्षतिग्रस्त हो गई कोशिकाओं को फिर से सेहतमंद बनाने का काम करती हैं। यदि इसकी पत्तियों से बने रस को कैंसर की पहली स्टेज वाले मरीज को दिया जाए तो उसके रोग के बढऩे की आशंका कम हो जाती है। वहीं दूसरी व आखिरी स्टेज के दौरान इसके प्रयोग से मरीज की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होकर उसके जीवित रहने की अवधि बढ़ सकती है।
*क्षारों में जीवाणुनाशक गुण पाये जाते हैं इसलिए पत्तियों का सत्व का उपयोग ‘स्टेफाइलोकाकल’ (Staphylococcal) तथा ‘स्टेªप्टोकाकल’ (Streptococcal) संक्रमण के उपचार में होता है। आमतौर से ये दोनों प्रकार के संक्रमण मनुष्य में गले (throat) एवं फेफड़ों (lungs) को प्रभावित करते हैं।
*पत्तियों में मौजूद विण्डोलीन नामक क्षार डीप्थिरिया के जीवाणु कारिनेबैक्टिीरियम डिप्थेरी Corynebacterium diptherae) के खिलाफ सक्रिय होता है। अतः पत्तियों के सत्व का उपयोग डिप्थिीरिया रोग के उपचार में किया जा सकता है।
*इसकी पत्तियों को तोड़े जाने पर जो दूध निकलता है, उसे घाव पर लगाने से किसी तरह का संक्रमण नहीं होता, खुजली होने पर भी लगाया जा सकता है।
*सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को पिम्पल्स पर लगाने से कुछ ही दिनों में इनसे छुटकारा मिल जाता है।
*पौधे के जड़ का उपयोग सर्प, बिच्छू तथा कीट विषनाशक (antidote) के रूप में किया जा सकता है।
उपर्युक्त के अतिरिक्त आज सदाबहार ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है क्योंकि इसमें कैंसररोधी (Anticancer) गुण पाये जाते हैं। सदाबहार से प्राप्त विनक्रिस्टीन तथा विनब्लास्टीन नामक क्षारों का उपयोग रक्त कैंसर (Leukaemia) के उपचार में किया जा रहा है।*सदाबहार की तीन – चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से मधुमेह रोग से राहत मिलती है |
* सदाबहार के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें | इससे मधुमेह ,मिटता है
| यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए |
*सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को पिम्पल्स पर लगाने से कुछ ही दिनों में इनसे छुटकारा मिल जाता है।
प्रयोग का तरीका:
इसके पत्तों को सुखाकर चूर्ण बना लें व रोजाना नाश्ते के बाद आधा ग्राम चूर्ण को सादा पानी से लें। इसके अलावा रस को भी प्रयोग में लाया जा सकता है। रोजाना पांच ताजा पत्तियों को पानी के साथ पीसकर बारीक कपड़े से छानकर रस निकालें व इसे भोजन करने के बाद पिएं।
* आधे कप गरम पानी में सदाबहार के तीन ताज़े गुलाबी फूल 05 मिनिट तक भिगोकर रखें | उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें | यह प्रयोग 08 से 10 दिन तक करें | अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ |विंका फूल का कैंसर के कुछ प्रकार जैसे ल्यूकेमिया (leukemia) और लिम्फोमा (lymphoma) के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। इस फूल से साइटोटोक्सिक (cytotoxic) प्रभाव पड़ता है, जो इसे कैंसर के खिलाफ प्रभावी बनाता है। इसे अन्‍य दवाओं में मिलाकर कीमोथेरेपी (chemotherapy) में भी प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसका प्रयोग एंटी-माइक्रोबियल (anti-microbial), एंटी हाइपरटेंसिव (anti-hypertensive) और एंटी डायबिटीक (anti-diabetic) के खिलाफ किया जाता है।
ध्यान रहे:
कड़वा स्वाद होने के कारण इसे खाली पेट लेने से उल्टी हो सकती है। इसलिए इसका प्रयोग कुछ खाकर ही करें। छोटे बच्चों को इसके रस में शक्कर या चूर्ण में गुड़ मिलाकर गोलियों के रूप में दिया जा सकता है।
साइड इफेक्‍ट
सदाबहार में कई सारे गुण होते हैं, लेकिन इसके साथ कुछ साइड इफेक्‍ट भी होते हैं। इसके उपयोग के बाद कई बार उल्टी, सिर दर्द, मतली, खून बहना और थकान आदि समस्याएं भी हो सकती हैं।


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